आतंकवाद का एक चेहरा यह भी...




हिन्दुत्ववादी फ़ासिस्टों की एक पुरानी तरकीब है जो लगभग हमेशा कामयाब होती है. साक्षर परन्तु अल्प-शिक्षित निम्न मध्य-वर्ग और मध्य-वर्ग को अपील करने वाले कुछ वाक्यांश, कविताओं के टुकड़े या ऎसी ही कोई अन्य शब्दावली जनता के बीच फेंक कर उसे तब तक दुहराते रहते हैं जब तक वह जनता के एक हिस्से की चेतना का हिस्सा न बन जाय. बाद में जनता के इसी हिस्से का उपयोग जनता की एकता को तोड़ने के लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं के रूप में किया जाता है. 'राम जन्म-भूमि', 'राम-सेतु', 'बच्चा-बच्चा राम का...........' ,'राम लला हम आयेंगे...', 'भय बिनु होय न प्रीति' आदि कुछ शब्दावलियाँ उदाहरण के तौर पर उद्धृत की जा सकती हैं. एक अन्य ख़तरनाक बात यह है कि मीडिया, ख़ास तौर पर दृश्य मीडिया का बड़ा हिस्सा भी जाने-अनजाने इन ख़तरनाक जुमलों को जनचेतना का हिस्सा बनाने में अहम भूमिका अदा करता दिखाई देता है . मीडिया का एक बहुत छोटा हिस्सा अगर इस झूठ को ध्वस्त करना भी चाहे तो उसका प्रयास चंद अंग्रेजीदां बुद्धिजीवियों और मध्य-वर्ग के एक अत्यंत छोटे हिस्से तक ही सीमित रह जाता है जिनकी आम जनता तक इस कटु सत्य को पहुंचाने की न तो इच्छा होती है न ही क्षमता. ऐसा ही एक मन्त्र नरेंद्र मोदी ने दिया था:- 'सारे मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं पर सारे आतंकवादी मुसलमान ही हैं'. परोक्ष रूप से यह कहने की कोशिश थी कि इस्लाम आतंकवाद का पोषक है और हिंदुत्व का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है. परन्तु सत्य यह है कि हिन्दुत्ववादियों के आतंकवादी कारनामे पूरे देश में होते रहे हैं. ये अलग बात है कि मीडिया ने उन पर उतना ध्यान नहीं दिया जितना दिया जाना चाहिए था.

पिछली दीपावली से ठीक पहले(१७/१०/२००९) गोआ में मारगाओ में एक स्कूटर मे रखे बम के धमाके में मालगोंडा पाटिल नाम के एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई और योगेश नाइक नामक एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया.सान्कोले में एक अन्य ट्रक में एक बम बरामद हुआ. यह ट्रक नरकासुर उत्सव के लिए ४० नौजवानों को ले जा रहा था. नरकासुर उत्सव गोआ में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है. दोनों ही मामलों में संदेह की सुई एक हिन्दुत्ववादी संगठन सनातन संस्था पर आकर टिकी. सनातन संस्था नरकासुर को बुराई का प्रतीक बता कर इस उत्सव का विरोध करती रही है. इधर मालेगांव धमाकों से जुड़े संगठन अभिनव भारत से भी सनातन संस्था के तार जुड़े होने की पुष्टि गोआ पुलिस ने कर दी. साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत अभिनव भारत के ११ सदस्यों को सितम्बर २००८ के मालेगांव धमाकों के सम्बन्ध में गिरफ्तार किया गया था. इसी सनातन संस्था का हाथ ठाणे के गडकरी रंगायतन में जून २००८ में हुए बम विस्फोटों में भी पाया गया. महाराष्ट्र के एण्टी टेररिस्ट स्क्वैड ने इस सम्बन्ध में जिन लोगों को गिरफ़्तार किया वे सब हिन्दू जनजागरण समिति के सदस्य थे जो सनातन संस्था का ही एक अनुषांगिक संगठन है. ये ही लोग पनवेल, वाशी, और रत्नागिरी के विस्फोटों में भी लिप्त पाए गये.
नांदेड, मराठवाडा में सिंचाई विभाग के कर्मचारियों की कालोनी में हुए धमाके के बाद जो तथ्य सामने आये वे भी मीडिया,विशेषकर हिन्दी मीडिया में अधिकतर उपेक्षित ही रहे. ये धमाका विभाग के एक ऐसे अवकाशप्राप्त कर्मचारी के घर में हुए थे जो लम्बे समय से एक हिन्दुत्ववादी संगठन से जुड़ा हुआ था. बाद की जांच में उसी घर में एक और बम भी बरामद हुआ. यही नहीं इस धमाके में मारे गये हिमांशु के घर से उस क्षेत्र की कई मस्जिदों के नक़्शे और स्थानीय मुस्लिमों द्वारा पहने जाने वाली पोशाकें भी बरामद हुईं. स्थानीय मुस्लिमों द्वारा पहने जाने वाली टोपियों का भी एक संग्रह उसी घर में मिला. एक हिन्दुत्ववादी कार्यकर्ता के घर से इन चीजों की बरामदगी के निहितार्थ समझने के लिए किसी दिव्यदृष्टि की आवश्यकता नहीं है.पीयूसीएल और धर्मनिरपेक्ष नागरिक मंच के सदस्यों की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार नांदेड के पुलिस महानिरीक्षक सूर्यप्रकाश गुप्ता ने इस बात की पुष्टि की कि लक्ष्मण राजकोण्डवार के घर से एक जीवित पाइप बम भी बरामद हुआ था और सारे ही आरोपी बजरंगदल से सम्बंधित थे. सूर्यप्रकाश गुप्ता का यह भी कहना था कि दरअसल कोण्डवार का घर बम बनाने का एक अड्डा था. महाराष्ट्र पुलिस ने मालेगांव धमाकों के सम्बन्ध में संघपरिवार से जुड़े कई संगठनों के कार्यकर्ताओं और सेना के कुछ सक्रिय और अवकाशप्राप्त सदस्यों की भूमिका को भी उजागर किया है . और महाराष्ट्र ही नहीं आतंकवादी गतिविधियों में इन संगठनों की भूमिका के प्रमाण मध्यप्रदेश के भिंड, उत्तरप्रदेश के कानपूर, तमिलनाडु के तेनकासी और केरल के कन्नूर तक बिखरे पड़े हैं. उत्तरप्रदेश में अलीगढ़ के निवासी भी गोमती एक्सप्रेस को रोक कर उसके मुस्लिम यात्रियों पर किये गये जानलेवा हमलों को अभी तक भूले नहीं हैं. नाथूराम गोडसे से चल कर श्रीकांत पुरोहित तक बहती आई हिन्दुत्ववादी आतंकवादियों की इस धारा से यह सबक लेने की ज़रूरत है कि आतंकवाद किसी भी समुदाय या धर्मं के चोगे में आये उसका लक्ष्य एक ही होता है- आम जनता के भाईचारे को ध्वस्त करना. और इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए वह किसी भी सीमा तक जा सकता है.

8 comments:

timeforchange said...

bhai sahab ,
kuch bhi likhne se pahle uski jaanch padtaal bhi kar lein , kyon hinduon ko aatankvaadi banane par tule hain ,isse kisi bhi tarah aap hinduon ko jaga to nahi rahein hain , musalmano ka aatankvaad se koi nata nahi hai , par ye bhi sachhai hai ki jayadatar aatankvadi ghatnayein muslims dwara hi ki jati hain .par agar aisa kaha jata hai to muslims main kitni narajgi hoti hai . to phir jo isme lipta nahi hai kam se kam use to baksa hi degiye , kyon mauka de rahein hai galat logon ko fayda uthane ka . aap ke is lekh se aap kisi bhi tarah secular to nahi lag rahe .

चन्दन कुमार said...

संघ को समझना हमारे भारतीय जनता को शायद आज तक नहीं आया है. अगर आज भी हिन्‍दुत्‍व जिंदा है तो संघ की वजह से, जब तक किसी भी स्थिती में दोष प्रमाणित नहीं हो जाता है, उसे हम आतंकवादी या आतंकवाद नहीं कह सकते

ali said...

संदीप भाई बहुत दिनों बाद आये हैं आप !
एक सुचिंतित और तथ्य परक आलेख ! ये ताकतें नौकरशाही और सत्ता में भी पैठ बना चुकी हैं जोकि खतरनाक संकेत है !

GAUTAM SACHDEV said...

आतंकवाद का एक चेहरा यह भी... आलेख में आतंकवाद के जिस चेहरे कों आपने उधृत किया है वो यथार्थता कों दर्शाता है |धर्म के द्वन्द में फसकर हम कब तक हिन्दू ,मुसलमान , संघ, मदरसा जैसे शब्दों से दो चार होते रहेंगे |यह सही मायने में एक विचारणीय प्रश्न है |अगर समस्या का समाधान हो पाए तो अमन की एक आस में देश की आम जनता कों शायद कुछ मिला पायेगा|आपके आलेख कों पढ़ते हुए अच्छा लगा |
आपका अनुज
गौतम सचदेव

Tarkeshwar Giri said...

musalman agar aise hi raha to hindu kab tak shant rahega.

Tarkeshwar Giri said...

chalo hindu jaga to sahi akhir kab tak sahega

shameem said...

jo log hidu atankwad mein wiswas nahi karte unhe guru gowalkar ki bunch of thought pad leni cahiye
aur rss ke digle pan ko to uska hi sahitya ujagar kar deta hai

Ajay Sharma Buhana said...

अरे ओ देशभगत सोच समझकर लिखा कर , आज तक जितने आकंक्वादी हमले हुए या जहा मुस्लिम देश वहा का वातावरण को धयान में रखकर सोचो की तुम किस पर आरोप लगा रहे हो ये बात गलत नहीं है की सभी मुस्लिम आतंकवादी नहीं है लेकिन सभी आकंक्वादी मुस्लिम है जय हिंद